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नीमच। म.प्र.जन अभियान परिषद जिला नीमच द्वारा महर्षि अरविन्द जी की जन्म जयंति के अवसर पर जिला स्तरीय व्याख्यानमाला का आयोजन आयुष विभाग सभाकक्ष नीमच में किया गया।
आयोजन के मुख्य अतिथि श्री निखिलेश वर्मा, संघ के सामाजिक दायित्व कार्यकर्ता, विशेष अतिथि व मुख्य वक्ता प्रो. डॉ संजय जोशी विभागध्यक्ष समाजशास्त्र विभाग पीजी कॉलेज नीमच, श्री गिरीराज सिंह चौहान जिला संयोजक गायत्री परिवार, श्री प्रवीण आर्य सिटी मिशन मेनेजर नगर पालिका नीमच, श्रीमती संगीता शर्मा प्राध्यापक श्री सीताराम जाजू शास. कन्या महाविद्यालय नीमच एवं जिला समन्वयक श्री नवनीत रत्नाकर ने कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि श्री अरविन्द के चित्र माल्यर्पण एवं दीप प्रज्जवलन कर किया।
अतिथियों का स्वागत जिला समन्वयक नवनीत रत्नाकर, विकासखण्ड समन्वयक महेन्द्रपाल सिंह भाटी, शिव शंकर शर्मा एवं परामर्शदाता दीपक नागता, योगिता पाटीदार द्वारा किया गया।
स्वागत उदबोधन एवं कार्यक्रम आयोजन का उदेश्य जिला समन्वयक ने किया।
मुख्य अतिथि श्री निखिलेश वर्मा ने अपने उदबोधन में हमारी प्राचीन भारतीय सांस्कृति, सभ्यता एवं जीवन दर्शन तथा श्रीमद भगवत गीता के दर्शनों से जीवन को सफल बनाने के लिए मागदर्शन दिया एवं महर्षि श्री अरविन्द के जीवन से प्रेरणा लेकर भारत देश के वैभव को पूर्णत: विश्वगुरू के रूप में स्थापित करने एवं प्राचीन वेदिक शिक्षा पद्धति एवं पाश्चात्य शिक्षा पद्धति के अंतर एवं इससे हमारे देश में आये परिवतनों से अवगत कराते हुए भारत की वसुधैव कुटुंबकम के ध्येय से समाज में सामाजिक समरसता स्थापित करने के लिए, तेरा मेरा, अपना, पराया, धर्म, जाति, वर्ण, सबकुछ भूलकर केवल एक श्रेष्ठ मनुष्य के रूप में जीवन जीने और राष्ट्र के परम वैभव और विश्व कल्याण के लिए प्ररेणास्पद मार्गदर्शन दिया।
मुख्य वक्ता प्रो.डॉ. संजय जोशी ने महर्षि श्री अरविन्द के जीवन दर्शन से परिचय करवाते हुए कहा कि राष्ट्र की सेवा में जिस प्रकार सुभाषचंद्र बोस एंव चंद्रशेखर आजाद ने अपना योगदान दिया है उसी प्रकार महर्षि ने भी आईसीएस जैसी परीक्षा उत्तीर्ण कर अंग्रेजी पद और प्रतिष्ठा को ठुकराकर राष्ट्र के लिए अपना समर्पण किया है। श्री अरविन्द भारतीय ओर विदेशी 16 भाषाओं में निपुण थे उन्होने राष्ट्रवादी क्रांतिकारी विचारधारा से ही नहीं बल्की धर्म, दर्शन एवं अध्यात्म से भी समाज कल्याण किया है, महर्षि जी ने कहा था कि हमें हमेंशा लेने के लिए नहीं बल्की देने के लिए जीवन जीना चाहिए, देश के लिए सबकुछ न्यौछावर करने वाले ही, सब कुछ त्याग करने वाले लोग ही जीवन में महानता का पद प्राप्त करते है। अरविन्द जी के लिखे हुये लेख लोगो में एक अलग ही अनूभूति उत्पन्न करते थे एवं आज भी उनका जीवन दर्शन लोगो का जीवन बदल रहा है। श्री अरविन्द एक ऐसा महान व्यक्तिव है जो देश ही नहीं वरन पूरी दुनियॉ में आज भी लोगो के हृदय में बसा हुआ है।
वक्ता श्री प्रवीण आर्य ने अपने उदबोधन में कहा कि अपने उदबोधन में कहा कि महर्षि श्री अरविन्द एक महान योगी एवं दार्शनिक के साथ-साथ प्रमुख क्रांतिकारी ओर एक महान कवि और गुरू भी थे, वे आत्मवान थे, उनका मानना था कि जो आत्मवान है होता है वहीं दूसरों का हृदय छू सकता है, उन्होने जन का मानस छुआ उनका मनना था कि आत्म रूपांतरण के सोपानों को पर करके ही अति मानस दिव्य विज्ञान तक पहुंचा जा सकता है। आज के युवाओं को महर्षि श्री अरविन्द के सिद्धांतो को जीवन में उतारना आवश्यक है।
वक्ता श्री गिरीराज सिंह चौहान ने कहा कि महर्षि अरविन्द मानवता के प्रणेता थो, जीवन को सफल बनाना है तो महर्षि अरविन्द के जीवन को आत्मसात करना आवश्यक है, उन्होने धर्म एवं अध्यात्म को परिभाषित कर बताया कि धर्म एवं अध्यात्म दोनो अलग है, अध्यात्म से हम मानवता का कल्याण कर सकते है, आज का समय वैज्ञानिक अध्यात्म का है, अरविन्द दर्शन आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना पहले था।
आयोजन के अंत में सभी को नशा मुक्त भारत अभियान एवं स्वैच्छिकता अभियान अंतर्गत शपथ विख समन्वयक श्री शिव शंकर शर्मा द्वारा दिलवाई गयी।
आयोजन में मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठयक्रम के विद्यार्थी, परामर्शदाता, नवांकुर एवं प्रस्फुटन समितियों के पदाधिकारी, कन्या महाविद्यालय के विद्यार्थीगण, सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन श्री पवन कुमरावत ने एवं आभार विख समन्वयक महेन्द्र पाल सिंह भाटी ने ने किया।