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MP न्यूज़
बिजली की कमी वैकल्पिक स्रोतों से होगी पूरी, मप्र में बिजली उत्पादन तो बढ़ा लेकिन खपत उससे ज्यादा बढ़ी
📅 09 Dec, 2025
📰 पूरी खबर:
तेजी से बढ़ रहा नवकरणीय ऊर्जा का उपयोग
भोपाल । मध्य प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ रहा है। इसके साथ ही खपत भी बढ़ रही है। इसलिए बिजली कंपनियों के लिए निर्बाध बिजली सप्लाई देना चुनौती है। इसमें भी घरेलू उपभोक्ताओं के साथ किसानों को भी अलग से बिजली दिए जाने का लक्ष्य है। इसी समस्या से निपटने के लिए अब प्रदेश में बिजली की कमी को पूरा करने के लिए राज्य सरकार नवकरणीय ऊर्जा पर जोर दे रही है, जिससे बिजली की खपत और उत्पादन के बीच सामंजस्य बिठाया जा सके।
मध्य प्रदेश में साल 2012 में नवकरणीय ऊर्जा की उत्पादन क्षमता 438.01 मेगावॉट थी। जबकि साल 2024 में इसकी उत्पादन क्षमता बढक़र 7300 मेगावॉट हो गई है। यानी इन 12 सालों में नवकरणीय ऊर्जा में 10 गुना तक की बढ़ोत्तरी हुई है। इसमें सोलर एनर्जी 4096.98 मेगावॉट है। वहीं, पवन ऊर्जा 2870.35 मेगावॉट और बायोमास में 108 मेगावॉट और जल परियोजनाओं से उत्पादन होने वाली बिजली 123.91 मेगावॉट है। अब अगले 5 साल में राज्य सरकार ने 14 हजार मेगावॉट के नए प्लांट लगाए जाने का लक्ष्य रखा है, जिससे प्रदेश में बिजली की जरूरत को पूरा किया जा सके।
उपभोक्ताओं की अपेक्षा कम हुआ उत्पादन
बिजली विभााग के अधिकारियों ने बताया कि मध्यप्रदेश में बिजली उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। लेकिन इसके साथ ही बिजली की खपत भी बढ़ी है। पिछले 5 साल में बिजली का उत्पादन प्रदेश में 23 करोड़ 39 लाख यूनिट बढ़ा है। यह बिजली खपत सिर्फ घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की है। बिजली खपत बढऩे के साथ ही घरेलू बिजली उपभोक्ताओं में भी बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले 5 साल में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में 6 लाख 11 हजार 461 का इजाफा हुआ। लेकिन मध्यप्रदेश में बिजली की जितनी आवश्यकता है, उस अनुपात में उत्पादन नहीं बढ़ रहा है।
घरेलू के साथ कृषि उपभोक्ताओं की संख्या भी बढ़ी
मध्यप्रदेश में साल 2020-21 में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 1.20 करोड़ थी। जबकि अब प्रदेश में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 1 करोड़ 26 लाख से अधिक हो गई है। घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की संख्या बढऩे के साथ ही बिजली खपत में भी इजाफा हो रहा है। घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के साथ ही कृषि उपभोक्ताओं की संख्या में भी इजाफा हुआ है। प्रदेश में कृषि उपभोक्ताओं की संख्या 35 लाख से अधिक हो गई है। 5 साल पहले कृषि उपभोक्ताओं की संख्या करीब 32 लाख थी, यानी कृषि उपभोक्ताओं की संख्या में 3 लाख का इजाफा हुआ है।
मध्य प्रदेश में बिजली की कमी पूरी करने की रणनीति
विद्युत विनियामक आयोग के सदस्य गजेंद्र तिवारी ने बताया कि केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण यानि सीईए की रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वर्ष 2027-28 तक मध्यप्रदेश में बिजली की मांग में वृद्धि होगी। वर्तमान प्रदेश में बिजली की मांग 19,000 मेगावॉट के करीब पहुंच चुकी है, जो आने वाले वर्षों में 22,000 मेगावॉट के आसपास हो सकती है। इसको देखते हुए बिजली की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है। नए अनुबंध के तहत कोयला आधारित सुपर क्रिटिकल तकनीक वाले थर्मल पॉवर प्लांटों और कुछ अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं से बिजली ली जाएगी। 900 मेगावॉट क्षमता राज्य के पहले से चालू और सक्षम पुराने पॉवर स्टेशनों से मिलेगी, जिससे तत्काल जरूरत की आपूर्ति हो सकेगी।
समय की जरूरत है नवकरणीय ऊर्जा
इस मामले में पर्यावरणविद् सुभाष सी पांडे बताते हैं देश और दुनिया में बढ़ रहे प्रदूषण का बड़ा कारण विद्युत निर्माण इकाइयां हैं। लेकिन ये जरूरत भी थी। अब जब हमारे पास नवकरणीय ऊर्जा का विकल्प है, तो इसमें ज्यादा से ज्यादा निवेश करना चाहिए। भविष्य की ऊर्जा का स्त्रोत सौर, पवन या हाइड्रोजन ऊर्जा ही होगी। लेकिन इसके लिए पहले से तैयारी करनी होगी। हालांकि इस मामले में अभी जनता और सरकार जागरूक नहीं हैं। लेकिन आने वाला समय खुद ब खुद साबित करेगा। जब हमारे पास पारंपरिक बिजली के स्त्रोत खत्म होंगे।
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