नई ‎दिल्ली । साल 2025 में सोना और चांदी ने निवेशकों को हैरान करने वाला रिटर्न दिया, लेकिन अब तांबा निवेशकों की नजर में नया किंग बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में तांबे की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। बाजार ‎विशेषज्ञों के मुता‎बिक एआई डेटा सेंटर्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (ईवी), ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिफिकेशन की बढ़ती जरूरत तांबे की मांग को तेजी से बढ़ा रही है। वैश्विक तांबा बाजार में 2025 में लगभग 1.24 लाख टन और 2026 में 1.50 लाख टन की कमी रहने का अनुमान है। भारत में तांबे का एकमात्र प्रमुख उत्पादक हिंदुस्तान कॉपर है, जिससे सप्लाई सीमित बनी हुई है। उनका कहना है कि बिजली के इस्तेमाल में वृद्धि, इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग और ग्रिड वायरिंग में तांबे की अहम भूमिका इसे रणनीतिक धातु बनाती है। इस साल अब तक तांबे की कीमतों में लगभग 35 फीसदी की तेजी आई है, जो 2009 के बाद सबसे बड़ी बढ़त मानी जा रही है। वर्तमान में तांबे की कीमत लगभग 12,000 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुँच चुकी है। निवेशक इसे सिर्फ सट्टा नहीं मान रहे, बल्कि वास्तविक मांग पर आधारित निवेश विकल्प के रूप में देख रहे हैं। बताया जा रहा है ‎कि 2026 में वैश्विक तांबे की मांग 27 मिलियन टन तक पहुंच सकती है, जिसमें अकेले चीन की मांग में 3.7 फीसदी की वृद्धि शामिल है। विशेषज्ञ मानते हैं कि एआई डेटा सेंटर्स, इले‎क्ट्रिक वाहनों और ग्रीन एनर्जी की तेजी से बढ़ती जरूरत तांबे की कीमतों को नए रिकॉर्ड तक ले जा सकती है।