नीमच सरस्वती विद्या मंदिर में रविवार को भारत और भारतीयता विषय पर विद्वतजन गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वल एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ ।
[video width="1920" height="1080" mp4="https://neemuchmalwaprimenews.com/wp-content/uploads/2025/12/video_20251214_115249.mp4"][/video]कार्यक्रम की प्रस्तावना में कहा कि आज के आयोजन का उद्देश्य समाज के बुद्धिजीवी, विचारवान लोग चिंतक, विद्वान व्यक्ति एक साथ बैठकर विचार करें , मिलकर बात करें ,मिलकर निर्णय करें और लिए गए निर्णय पर मिलकर चलें तभी हम समाज और अपने राष्ट्र को दुष्ट शक्तियों से सुरक्षित रख सकेंगे। आपने संगोष्ठी के विषय *भारत एवं भारतीयता का बोध* को भी स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत वो है जो सहयोग और सरोकार सिखाता है , प्रेम , आत्मीयता, करूणा ,दया सत्य को अपनाता है और भारतीयता जीवन दृष्टि है, आचरण है ,धर्म है, अध्यात्म है जिसे धारण किया जाता है। आपने कहा कि इसी भारतीयता के कारण ही भारत सदियों तक विश्व से आदर , प्रतिष्ठा प्राप्त की विश्व गुरु का विश्व के सिरमौर देश का पद प्राप्त किया । हमारे भारत की इसी खुबियों की इसी भारतीयता की प्रशंसा उस समय विश्व के अनेक देशों से भारत आए विद्वानों ने पर्यटकों नी अपनी पुस्तकों में की है । हम जिस क्षेत्र में कार्यरत है वहां हम ईमानदारी से अपना धर्म निभाकर कार्य करें अपने मन में धर्म का भाव ही भारतीयता है l विभाग समन्वयक महोदय श्री राघवेंद्र जी देराश्री ने भी अपने वक्तव्य में कहा कि विद्वत परिषद विद्या भारती की ही एक इकाई है जो समाज के प्रबुद्ध नागरिकों को एक मंच पर लाकर समाज और राष्ट्र के विभिन्न मुद्दों, विषयों पर विचार विमर्श करने , समस्याओं के समाधान निकलाने हेतु , उपायों हेतु चिंतन करने और उसे फिर समाज के अन्यान वर्गों और आम लोगों तक ले जाने और उन्हें जागरूक करने का कार्य प्रदान करता है । समाज और नीमच जिले के बुद्धिमान और प्रबुद्ध लोग समय समय पर विभिन्न विषयों पर समय समय पर इस तरह गोष्ठी के माध्यम से समाज में एक वेचारिक पर्यावरण निर्मित कर सकतें हैं ।
कार्यक्रम में पधारे शहर के कई विद्वतजन ने इस विषय पर अपने-अपने विचार रखकर चर्चा की जिसमें कई महत्वपूर्ण बिन्दुओ की ओर सभी ध्यान आकर्षित हुआ l भारत सोने की चिड़िया कहलाता है लेकिन हम आज अपनी संस्कृति को खोते जा रहे हैं, भारत माता अगर हमारे देश का नाम है तो यहां के रहने वाले सभी मेरे भाई हैं ऐसे मन में भाव रहे, संस्कृत का ज्ञान होगा तभी भारतीय ता का बोध होगा, स्व के बोध को ही भारतीयता कहेंगे l रामायण एवं गीता से संबंधित पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा, सबसे बड़ी समस्या धर्मांतरण हैं आदि l पधारे गए अतिथि रविंद्र जी सोहनी ने बहुत ही दृढ़ता पूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि हमारे भारत की संस्कृति का नाश नहीं हो रहा है संस्कृति तो भारत की ही बची है पा श्चात संस्कृति का असर जो हमारे बच्चों पर पढ़ रहा है आपकी अपनी जिम्मेदारी है कि बच्चों को घर में ही वेद रामायण गीता की जानकारी दे l आप सभी अपने बच्चों को अंग्रेजी मध्याम में पढ़ाना चाहते है तो हमारी भी मजबूरी है कि हमें अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलने पडे हम बड़े -बड़े भवनो के ताले नहीं लगा सकते अपने पांच 'भ' की बात कही अपने आश्वासन दिलाया कि पाठ्यक्रम में रामायण रामकृष्ण की छोटी-छोटी कविता,कहानी,नाटक लिखा जा रहा है l आपने कहा कि भारत में जन्म लिया यह हमारे सौभाग्य की बातें यहां जब सूरज आता है तो भगवा दिखाई देता है और जाता है तब भी भगवा दिखता है आपका कहना था कि फ्रेंच राइटर रोमियो रोला ने कहा कि जहां सभ्यता ने अपनी आंखें खोली वह भारत ही हैं ।हमने राष्ट्र की कल्पना मां के रूप में की है l हमारे यहां ऋग्वेद की दिशाओं में लिखा है कि सत्य एक ही कहने का तरीका अलग-अलग है । भारतीयता का बोध आपको अपने घर से शुरू करना होगा।
विष्णु जी नारोलिया ( प्रबंधन केशव विद्यापीठ इंदौर प्रांत संयोजक विद्वत परिषद मालवा प्रांत )ने अपने उद्बोधन में कहा कि अकेले खाना विकृति है और मिल बाट(बाँट कर खाना भारत की संस्कृति है, आपका कहना था कि जीवन में भारतीयता लाना है तो भारत से वेस्टर्न को हटाना होगा । सिकंदर विश्व विजेता बनना चाहता था परंतु सुकरात ने कहा की सिकंदर भारत को जितना बहुत कठिन है वहां से तुम पहले गंगाजल,रामायण, महाभारत,अमरबेल,बांसुरी आदि को जानो वहाँ का अर्पण,समर्पण जानो । इसलिए हमें स्व के भाव को जानना होगा । अनेक दृष्टांतों के माध्यम से आपने महत्वपूर्ण जानकारिया दी ।
कार्यक्रम के अतिथि के रूप में श्री रविंद्र जी सोहनी, श्रीविष्णु जी नारोलिया एवं डॉ संजय जी जोशी मंचासीन रहे एवं विभाग समन्वयक राघवेंद्र जी देरा श्री समिति के अध्यक्ष श्री प्रहलादराय जी गर्ग सचिव निलेश जी पाटीदार प्राचार्य कविता जी जिंदल प्रधानाचार्य जूही जैन उपस्थित रहे l कार्यक्रम का आभार प्राचार्य श्री महेश जी गदले द्वारा माना गया ।