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नीमच.स्थानीय न्यू इंदिरा नगर निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक श्री चंद्रदेव शर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती बसंती बाई शर्मा (गाँव सकरनी रैयत) का शनिवार रात्रि 80 वर्ष की आयु में शांतिपूर्वक देवलोकगमन हो गया। रविवार को उनका अंतिम संस्कार पूर्ण श्रद्धा एवं धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न हुआ।

ज्ञातव्य है कि लगभग 39 वर्ष पूर्व कुएँ में गिरने से गंभीर रूप से घायल होने के कारण वे जीवनभर बिस्तर पर रहीं। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अद्भुत धैर्य, आस्था और जीवटता के साथ जीवन व्यतीत किया। उनके पति, पुत्र, पुत्रवधू एवं परिवार के अन्य सदस्यों ने पूरे समर्पण भाव से उनकी सेवा की। शनिवार रात्रि वे शिवनिद्रा में लीन हो गईं।

श्रीमती बसंती बाई शर्मा हंसमुख, सौम्य, विनम्र, धार्मिक एवं सामाजिक व्यक्तित्व की प्रतिमूर्ति थीं। वे स्व. श्री केदारलाल, स्व. श्री वर्दीचंद्र एवं स्व. श्री लालूराम (सकरानी रेवत वाले) की अनुजवधू, सकल ब्राह्मण कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट श्री दिलीप शर्मा की पूजनीय माताजी तथा समर्थ शर्मा की दादी थीं। वे अपने उदार एवं स्नेहमयी स्वभाव के कारण समाज में विशेष सम्मान रखती थीं।

रविवार प्रातः न्यू इंदिरा नगर स्थित निवास से उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें शहर के गणमान्य नागरिकों, समाजजनों, रिश्तेदारों एवं शुभचिंतकों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुक्तिधाम पर आयोजित शोकसभा में जोधपुरा ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष श्री संजय शर्मा, सचिव श्री राजेश शर्मा, योगेश  पंत, श्याम शर्मा ( टिंबर) , डॉ अक्षय राजपुरोहित, सत्यानारायण पाराशर, एडवोकेट सुरेश शर्मा, एडवोकेट विनू शर्मा, एडवोकेट शांतिलाल जैन, सिद्धूलाल पुरोहित, अंबिका प्रसाद जोशी, डॉ. अनिल दुबे, सुभाष तुगलावत,महेश लक्ष्यकार्, संजय धिंग, उमेश शर्मा, अशोक पोरवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।

उल्लेखनीय है कि शोक की इस घड़ी में भी परिजनों ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए लायंस क्लब नीमच के माध्यम से दिवंगत की नेत्रदान की इच्छा पूर्ण कर समाज को मानव सेवा का प्रेरक संदेश दिया।

कलयुग के श्रवण कुमार बने एडवोकेट दिलीप शर्मा

शोकसभा में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि एडवोकेट श्री दिलीप शर्मा ने अपनी माताजी की लगभग 39 वर्षों तक निरंतर निस्वार्थ भाव से सेवा कर आधुनिक युग में ‘कलयुग के श्रवण कुमार’ होने का गौरव प्राप्त किया है। परिवार के अन्य सदस्यों के सहयोग के साथ उन्होंने जिस समर्पण, धैर्य और श्रद्धा से मातृसेवा की, उसकी सभी ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

वक्ताओं ने कहा कि श्री दिलीप शर्मा ने समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी के समक्ष यह अनुकरणीय संदेश प्रस्तुत किया है कि "माता-पिता से बढ़कर इस संसार में कोई नहीं। उनकी सेवा ही सबसे बड़ा धर्म, सबसे बड़ी पूजा और जीवन का सर्वोच्च सौभाग्य है।" उनकी मातृभक्ति सदैव समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।