रतलाम। यात्रियों की यात्रा को अधिक सुगम बनाने तथा ट्रेनों की समयपालनता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के परिचालन विभाग द्वारा वर्ष 2025 में ट्रेनों के परिचालन समय में उल्लेखनीय सुधार किया गया है। साथ ही 01 जनवरी 2026 से लागू होने वाली नई समय सारणी में भी 63 ट्रेनों को स्पीड-अप किया गया है। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी श्री मुकेश कुमार द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार मंडल रेल प्रबंधक के कुशल मार्गदर्शन एवं परिचालन विभाग के अधिकारियों के प्रभावी निर्देशन में समय सारणी तैयार करने वाले पर्यवेक्षकों द्वारा ट्रेनों के लिंक एवं संसाधनों का बेहतर उपयोग किया गया। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2025 में रतलाम मंडल पर 27 ट्रेनों की गति बढ़ाई गई, जिससे इन ट्रेनों के रनिंग टाइम में प्रतिदिन औसतन 107 मिनट की बचत हुई। उन्होंने आगे बताया कि 01 जनवरी 2026 से ट्रेनों के लिए नई समय सारणी लागू की जा रही है। इस नई समय सारणी के निर्माण में भी ट्रेनों के परिचालन समय को कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके फलस्वरूप कुल 63 ट्रेनों की गति बढ़ाई गई है। इनमें नागदा–रतलाम–गोधरा खंड की 26 ट्रेनें, नागदा–उज्जैन/भोपाल–इंदौर–डॉ. अम्बेडकर नगर खंड की 27 ट्रेनें तथा रतलाम–चित्तौड़गढ़ खंड की 10 ट्रेनें शामिल हैं। इससे वर्ष 2026 में रतलाम मंडल पर चलने वाली ट्रेनों के रनिंग टाइम में साप्ताहिक आधार पर लगभग 2627 मिनट की बचत होगी। नई समय सारणी के अंतर्गत जिन प्रमुख ट्रेनों को स्पीड-अप किया गया है, उनमें दाहोद–वडोदरा मेमू (40 मिनट), दाहोद–रतलाम मेमू (15 मिनट), गोरखपुर–बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस (15 मिनट), भोपाल–डॉ. अम्बेडकर नगर इंटरसिटी (10 मिनट), नागपुर–इंदौर एक्सप्रेस (20 मिनट), बिलासपुर–इंदौर नर्मदा एक्सप्रेस (27 मिनट), उज्जैन–इंदौर पैसेंजर (10 मिनट), मंदसौर–कोटा एक्सप्रेस (10 मिनट), रतलाम–चित्तौड़गढ़ डेमू (15 मिनट), उदयपुर सिटी–रतलाम एक्सप्रेस (10 मिनट) एवं चित्तौड़गढ़–रतलाम डेमू (20 मिनट) प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त अन्य कई ट्रेनों को भी 2 से 8 मिनट तक स्पीड-अप किया गया है। ट्रेनों की गति बढ़ाने में परिचालन विभाग के साथ-साथ इंजीनियरिंग (ट्रैक मेंटेनेंस), संकेत एवं दूरसंचार, यांत्रिक विभाग तथा संरक्षा से जुड़े अन्य विभागों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ट्रेनों की गति बढ़ने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि कम समय में गंतव्य तक पहुंचने के कारण ऊर्जा की बचत भी सुनिश्चित होगी। यह यात्रियों के लिए सुविधा का एक महत्वपूर्ण पहलू है, क्योंकि इससे वे अपने गंतव्य तक वर्तमान की तुलना में कम समय में पहुंच सकेंगे।