नीमच (निप्र)। शहर के नीमच सिटी जूना बाजार भटनागरजी के पुराने बैंक परिसर में   चल रही श्रीमद भागवत  कथा के तीसरे दिन कथावाचक पं. राजेंद्र पुरोहित (सांवलियाजी मंदिर, नीमच सिटी) ने सर्वप्रथम विधिवत पूजन कर कथा का शुभांरभ किया। कथा में उन्होंने दक्ष की पुत्री सती का प्रसंग सुनाते हुए बताया महाराज दक्ष की पुत्री सती को शैलपुत्री भी कहा जाता था। दक्ष का राज्य कश्मीर इलाके में था। मां सती ने एक दिन शिव के दर्शन किए और उनके प्रेम में पड़ गई। सती ने दक्ष की इच्छा के विरुद्ध भगवान शिव से विवाह कर लिया। दक्ष इस विवाह से संतुष्ट नहीं थे। दक्ष ने एक विराट यज्ञ का आयोजन किया। लेकिन उन्होंने दामाद शिव और पुत्री को यज्ञ का निमंत्रण नहीं भेजा। फिर भी सती दक्ष के यज्ञ में पहुंच गई। दक्ष ने पुत्री के यज्ञ में आने पर उपेक्षा का इजहार किया और शिव के विषय में सति के सामने ही अपमानजनक बातें कीं। सती यह सब बर्दाशत नहीं कर सकी। और इस घोर अपमान के कारण यज्ञ कुंड में कूद कर अपने प्राणों की आहूति दे दी। बस यही से सति के शक्ति बनने की कथा शुरु होती है। 
संगीतमय कथा के दौरान राजेंद्र पुरोहित ने कहा परमात्मा से सदा हम कुछ ना कुछ मांगते रहते है लेकिन कुछ ना मांगकर सदा परमात्मा की भक्ति में रहो। वे खुद ही आपके सारे कार्य संवार देंगे।  संगीतमय कथा के दौरान भजनों से सभी मंत्रमुग्ध हो गए।प्रभु आरती कर प्रसाद वितरित किया गया।  पंचकुंडी यज्ञ यज्ञाचार्य  प. बबलू शर्मा, पं. पुष्कर नागदा के द्वारा यज्ञ कराया जा रहा है। कथा का आयोजन प्रतिदिन दोपहर 12.30 बजे से शाम 4 बजे तक नीमच सिटी के समस्त महिला भंडल एवं भक्तजनों द्वारा मलमास के पवित्र मास में पहली बार पंचकुंडी यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।