भोपाल । आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी मध्यप्रदेश शासन द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में राज्य स्तरीय संवेदनशीलता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण को सार्वभौमिक एवं समयबद्ध रूप से सुनिश्चित करना था। कार्यक्रम का शुभारम्भ विकास मिश्रा, आयुक्त, DES द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में जन्म लेने वाला हर बच्चा—बिना किसी अपवाद के जन्म प्रमाण-पत्र प्राप्त करें, यह हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने पंचायत, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, नगरीय प्रशासन विभाग एवं चिकित्सा संस्थानों के बीच मज़बूत समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य बिंदु यूनिसेफ की प्रतिनिधि श्रीमती पूजा सिंह ने कहा कि जन्म प्रमाण-पत्र बच्चों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, स्वास्थ्य लाभों और शैक्षिक अधिकारों तक पहुँच का आधार है। डॉ. सुनीत टंडन डीन गांधी मेडिकल कॉलेज ने अस्पताल में जन्म प्रमाण-पत्र की डिजिटल और सुगम प्रक्रिया का उदाहरण साझा किया और इसकी अन्य अस्पतालों में विस्तार की आवश्यकता बताई। DES द्वारा यह भी घोषित किया गया कि अब राज्य में हर बच्चे—विशेषकर बाल देखभाल संस्थाओं और दत्तक ग्रहण केंद्रों में रहने वाले बच्चों का समय पर जन्म पंजीकरण सुनिश्चित किया जाएगा। कार्यशाला में विवाह पंजीकरण को भी मजबूत CRVS प्रणाली के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में चर्चा में शामिल किया गया। प्रो. अनुपमा रावत ने योजना निर्माण एवं जिला स्तरीय निर्णय प्रक्रिया में सटीक डेटा की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। शरद दुबे, सेवानिवृत्त एसपी ने जमीनी अनुभवों और सामुदायिक स्तर पर रिपोर्टिंग को मजबूत करने के सुझाव साझा किए। संजीव दुबे, नगरीय प्रशासन विभाग ने सीएम हेल्पलाइन से प्राप्त नगरीय क्षेत्रों के मुद्दों और उनमें बेहतर समाधान के लिए पंजीकरण प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। कार्यशाला में DES, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, चिकित्सा महाविद्यालयों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं सहित 160 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की। सत्र अत्यंत संवादात्मक रहे और कई उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को सम्मानित भी किया गया। आयुक्त मिश्रा ने पुनः यह प्रतिबद्धता दोहराई कि प्रदेश में हर जन्म और हर मृत्यु का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाएगा तथा हर बच्चे यहाँ तक कि CCIs और दत्तक केंद्रों में रहने वाले बच्चों को जन्म से ही कानूनी पहचान प्रदान की जाएगी।